Friday, February 11, 2011

'शक्ति' पर कहर

इस देश की अजब ही बिडंबना है....अजीब है इस देश में सबकुछ....जहां की उच्च सत्ता पर महिलाओं का कब्जा हो...वहां की महिलाएं सुकुन की जिंदगी से कोसों दूर हैं...हर पल खौफ में जीने को मजबूर है देश की आधी आबादी....यहां तो हर आधे घंटे के दौरान महिलाओं की इज्जत को तार-तार कर दिया जाता है...हर तीन मिनट पर उन्हें अपराध का शिकार बनाया जाता है....क्या ये एक लोकतंत्र के लिए शर्मनाक नहीं है....समानता के अधिकार का मजाक नहीं है...दर्द तो इस बात का है कि आज उच्च पदों पर बैठे लोग भी इस कड़वी हकीकत से नजरे चुराते नजर आते हैं...दर्द एक और है....और उस दर्द का रिश्ता हमारे उपराष्ट्रपति की पत्नी से है...जो खुद को मजबूर पाती हैं...बेबस पाती हैं....और आखिर में अपने उस दर्द को बेहद ही खौफनाक शब्दों में बयां करती है....तो क्या ये समझा जाए कि आधी आबादी की जिंदगी जलालत बन चुकी है...और अत्याचार उनकी किस्मत.. शुक्रवार शाम होते होते देश के अलग-अलग इलाकों से कई खबरें आती है....और ये खबरें महिला अस्तित्व से जुड़ी हुई होती है....उन खबरों के पीछे पुरुष की उस घिनौनी मानसिकता भी नजर आती है....जिसके तहत वो महिलाओं को सदियों से गुलाम मानता आया है....नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से एक बैग में महिला की लाश मिलती है...और देखते ही देखते सनसनी फैल जाती है....लखनऊ में एक युवक अपनी बाइक पर एक बारहवीं की छात्रा को बिठाना चाहता है...लेकिन वो लड़की बाइक पर बैठने से मना कर देती है...गुस्से में लड़का उस पर गोलियां दाग देता है....मध्यप्रदेश के जबलपुर में लड़की ने छेड़छाड़ से मना किया तो उसे जिंदा आग के हवाले कर दिया गया...ये सिर्फ एक दिन की खबरें हैं...पूरे महीने पर नजर डालेंगे तो तस्वीर और भयावह नजर आएगी...और पूरे साल की तो बात ही मत कहिए...हो सकता है आप ये कहने को मजबूर हो जाएं कि इस देश का तो भगवान ही मालिक है...
हर 3 मिनट पर 1 महिला होती है अपराध की शिकार
हर 9 मिनट पर पति या रिश्तेदारों की क्रूरता की शिकार
हर 29 मिनट में 1 महिला होती है रेप की शिकार
हर 77 मिनट पर दहेज हत्या का 1 मामला
हर 240 मिनट पर 1 महिला करती है खुदकुशी
चौंकिए मत...ये उसी भारत की भयावह तस्वीर है...जहां नारी को देवी स्वरूपा माना गया है...ये उसी भारत की तस्वीर है जहां के लोकतंत्र की गाथा पूरी दुनिया गाती है...ये उसी भारत की तस्वीर है जहां के राष्ट्रपति खुद एक महिला है...संसद की अध्यक्षता एक महिला ही करती है...देश की सत्ता पर काबिज यूपीए अध्यक्ष भी एक महिला ही है और सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश की सत्ता भी एक महिला के हाथों में हैं....सुनने में भले ही ये सुखद लगे कि देश की उच्च सत्ता पर महिलाएं विराजमान हैं...उम्मीद की जा सकती है कि उस देश की महिलाओं की जिंदगी खुशहाल, उम्मीदें जगाने वाली और सतरंगी सपनों से लबरेज हो....लेकिन जब असलियत सामने आती है तो कलेजा मुंह को आ जाता है....जरा इस तस्वीर के एक और पहलु को भी देख लीजिए....शुरुआत करते हैं उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी के उस बयान से...जिसमें दर्द भी है...हमारी व्यवस्था को लेकर हताशा भी है और कड़वी हकीकत भी... लेकिन इस बयान पर बवाल खड़ा करने के बजाय गौर करने की जरूरत है....आखिर क्यों इस देश के उपराष्ट्रपति की पत्नी को कहना पड़ा कि बेटियों को पैदा होते ही मार दो...ताकि उन्हें बलात्कार जैसी घिनौनी करतूतों का शिकार ना होना पड़े....देश में महिलाओं के हालात क्या है ये किसी से छिपा भी नहीं है...घर के दहलीज से लेकर बाहर सड़क तक...हर जगह करनी पड़ती है आबरू की हिफाजत के लिए जद्दोजहद....खैर अब जरा नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के उन आंकड़ों पर भी नजर डाल ही लेते हैं...साल 2009  के इन आंकड़ों के मुताबिक देश भर में महिलाओं से जुड़े 203804 मामले दर्ज किए गए...जिनमें बलात्कार के 21397 मामले सामने आए...जबकि महिलाओं के अपहरण के मामलों की संख्या 25741 रही...इसी तरह छेड़छाड़ के 38711 मामले दर्ज किए गये....जबकि यौन प्रताड़ना से संबंधित मामलों की संख्या 11009 रही...घर के दहलीज के अंदर महिलाएं कितनी सुरक्षित है....इन आंकड़ों से पता चल जाता है...अकेले 2009 में पति या फिर दूसरे संबंधियो की कूरता 89546 महिलाओं पर कहर बनकर बरपी....देश की राजधानी दिल्ली की हालत तो और चौंकाने वाली है....देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में से 23-8 फीसदी अकेले दिल्ली में ही होते हैं....आंकड़ों के लिहाज से देश में हर चौथी बलात्कार की घटना दिल्ली में ही होती है....देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश तो महिला अपराधों के मामले में सारी हदें पार कर दी है....यहां महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध देश के मुकाबले 11.9 फीसदी रही...आंकड़ों के मुताबिक इस प्रदेश में औसतन छह दिनों में एक महिला की अस्मत लूटी गई....चलिए इन अपराधों की एक बानगी भी देख लेते हैं....


हरियाणा की प्रीति बहल ने टीटीई के छेड़छाड़ से तंग आकर रेलवे ट्रैक पर जान देने की कोशिश की
जयपुर में एक युवक ने प्रेम का प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद कोचिंग से लोट रही छात्राओं के मुंह पर तेजाब फेंका
दिल्ली में सीआरपीएफ के एक जवान ने अपने साथी के साथ मिलकर छात्रा से किया चार महीनों तक बलात्कार
दिल्ली में एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल पर चार शिक्षिकाओं ने लगाए बलात्कार के आरोप
पटना में एक सीआरपीएफ जवान ने मोबाइल नंबर नहीं देने पर एक महिला खिलाड़ी को गोलियों से भूना
उत्तरप्रदेश में बलात्कार का विरोध करने पर दबंगों ने एक लड़की के हाथ पैर काट डाला
जेएनयू में पैसा कमाने की लालच में छात्रा की ब्लू फिल्म बनाई
लुधियाना में एक विवाहिता ने दहेज प्रताड़ना से तंग आकर आत्मदाह किया
मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर में छेड़छाड़ के विरोध करने पर लड़की को जिंदा जलाया

ये तो उदाहरण भर है....उत्तरप्रदेश का बांदा दुष्कर्म केस और बिहार का रुपम मामला भी हमारी व्यवस्था पर सवाल खड़े करने के लिए काफी है....और हां खाप पंचायते तो पहले से ही महिलाओं को अपना शिकार बनाती रही है....जाहिर है अब तो आप समझ चुके होंगे कि सलमा अंसारी आखिर निराश क्यों है

Monday, February 7, 2011

नक्सलवाद: सबसे बड़ी चुनौती


नक्सलवाद तेजी से फल फूल रहा है...अपने ही देश के लोग लोकतंत्र को चुनौती दे रहे हैं....कामरेड माओ के सिद्धांत को मानने वाले इन लोगों के मुताबिक राजनीतिक शक्ति बंदूक की नली से निकलती है....यही वजह है कि इस सिद्धांत को जिंदा रखने के लिए जब तब इंसानी बलि भी ली जाती है...ये नक्सलियों की बढ़ती ताकत नहीं तो और क्या है....जिसके आगे सारा तंत्र बेबस हो जाता है....वे जब चाहे...तब सिस्टम की धज्जियां उड़ा देते हैं....बेकसूर लोगों को मौत की नींद सुला देते हैं....देश की संप्रभुता को चुनौती देने वाली इन ताकतों के हाथ विदेशी ताकतों से भी मिले होते हैं..वे कहते हैं कि देश में गरीबी है...अन्याय है और गैरबराबरी है....इसलिए देश को लाल क्रांति की जरूरत है....इसके लिए लोगों का खून बहता हो तो बहे....ताज्जुब तब और होता है जब,.गरीबी, बीमारी और भूखमरी को ढाल बनाए इन हाथों को एक खास तरह के बुद्धिजीवियों का समर्थन भी मिल जाता है...उनके पक्ष में लोकतंत्र के प्रहरियों के बीच से ही कई आवाजें उठने लगती है....लेकिन सच्चाई यही है कि नक्सली लोकतंत्रिक भारत के लिए पूरी तरह खतरा बन चुके हैं...देश अपने ही भीतरी राज्यों में छापामार युद्ध झेलने को मजबूर है....पिछले साल नक्सलियों ने कई राज्यों में हिंसा का तांडव मचाया...सिर्फ अप्रैल महीने में ही पांच राज्यों में 16 जगहों पर हमले किए गए...इसके बाद भी ये तांडव रुका नहीं...दंतेवाड़ा में पुलिस को निशाना बनाकर नक्सलियों ने ये दिखा दिया कि उनकी रणनीति,  हथियार और मारक क्षमता पहले से बेहतर हुई है...सबसे बड़ी बात...नक्सली देश के ज्यादातर राज्यों में अपनी पहुंच बना चुके हैं...साल 2004 में दो नक्सली गुटों एमसीसी और पीपुल्स वार ग्रुप के भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी माओवादी में विलय होने के बाद वे देश के करीब एक तिहाई हिस्से में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं..देश का 92 हजार किलोमीटर का इलाका नक्सली प्रभाव क्षेत्र में आता है...जिसे रेड कॉरिडोर कहा जाता है...223 जिलों में नक्सलियों की पैठ की बात सरकार भी मान चुकी है...आज देश के 14 राज्यों में नक्सवाद की लाल धारा बह रही है...लेकिन उन्हें रोकने में शासन पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है....अब तो कहा ये भी जाता है कि उनकी सांठगांठ पाकिस्तान के आईएसआई और दूसरे संगठनों से हो चुकी है...इस कारण वे पहले से और ज्यादा उग्र हो गए हैं.... उनके पास आधुनिक हथियार है...उनकी ताकत दिनोंदिन बढ़ती जा रही है...पिछले तीन सालों के दौरान नक्सलियों ने दो हजार से ज्यादा लोगों की जानें ले ली है....पिछले साल नक्सली हिंसा में 877 आम नागरिकों की मौत हुई...जो पिछले दो सालों की तुलना में काफी ज्यादा है...जाहिर है इसमें हमेशा की तरह इसका खामियाजा आम लोगों को ही भुगतना पड़ता है....बहरहाल नक्सलियों के हौसले बुलंद है...वो बार एक नई ताकत के साथ हमला करते हैं....और सरकार उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाती...

Saturday, January 29, 2011

मी गांधी बोलतेयो

वैष्णव जन तेने कहिए पीर पराई जान रे....ये मेरा प्रिय भजन है....जब तक जीवित रहा...इसे आत्मसात करता रहा....मुझे खुशी है कि मेरी मौत के बाद भी लोग इसे भूले नहीं है....आपको मेरी आवाज सुनकर ताज्जुब हो रहा होगा.....मैं महात्मा गांधी हूं....मोहनदास करमचंद गांधी वल्द करमचंद गांधी....दुनिया वाले प्यार से मुझे बापू बुलाते हैं.....वैसे रविंद्रनाथ टैगोर ने सबसे पहले मेरा नाम दिया था महात्मा...बाद में लोग भी मुझे महात्मा गांधी कहने लगे....प्यारे देशवासियों आज मेरी शहादत के 63 साल गुजर गए...लोग मेरी मौत को शहादत क्यों कहते हैं...अभी तक मुझे ये समझ में नहीं आया...लेकिन फिर भी इस शब्द का इस्तेमाल मुझे इसलिए करना पड़ रहा है कि क्योंकि ज्यादातर लोग मानते हैं कि मैं अपने कर्तव्य के बलिवेदी पर कुर्बान हुआ हूं....खैर आपका सोचना कितना सही है...इस बारे में मैं गहराई से जाना नहीं चाहता....मैं तो अपनी मौत के 63 साल बाद आपसे कुछ कहने आया हूं...पता नहीं आप मेरी बातों को कितना गंभीरता से लीजिएगा...कुछ बातें ऐसी भी होती हैं...जिसपर वक्त का धूल नहीं जमता...बल्कि वो हजारों साल बाद भी नूर की तरह चमकती रहती है...आज भी मैं आपसे कोई नई बात कहने नहीं जा रहा हूं....बल्कि पुरानी कही गई बातों को ही फिर से दुहरा रहा हूं......आज पूरा देश महंगाई, भ्रष्टाचार और भुखमरी से त्रस्त है....गरीब पहले से और गरीब होता जा रहा है...पूरी दुनिया बाजारवाद की गंभीर प्रसव पीड़ा से जूझ रही है....अपना देश भारत भी उन्हीं राहों पर निकल पड़ा है.....अगर आप मेरी बातों को ध्यान रखते तो शायद देश आज इस हालत में नहीं होता...भ्रष्टाचार और महंगाई तो इससे दूर ही रहती....मैं चिंता में डूबा हूं....पूरी दुनिया में आज दो अलग अलग तरह की दौड़ हो रही है...एक दौड़ उन लोगों की है जो संपन्न हैं...पर कुछ और पाने की लालसा लिए दौड़ में लगे हैं...दूसरी दौड़ उन लोगों की है जो दो जून की रोटी के लिए अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए जूझ रहे हैं....मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि आप भी उस दौड़ में लग चुके हैं....मुझे लगता है शायद आप मेरे उस मंत्र को भूल गए होंगे...जो मैने आपको दिया था ...
.जब भी कोई काम हाथ में लो..ये ध्यान रखो कि इससे सबसे गरीब और कमजोर व्यक्ति को क्या लाभ होगा...
लेकिन आज कौन सुनता है...कौन याद रखता है मेरी बातों को....सब अपने ही धुन में लगे पड़े हैं....शायद नतीजों से अंजान...उन्हें नहीं पता कि बाजारवाद का अंत कितना खतरनाक होता है...समाज के एक हिस्से को कुचलना भले ही आसान हो...पर याद रखो...उनकी आह तुम्हारे हिस्से की रोटी भी एक दिन छिन लेगी.... आप क्यों नहीं अपनाते मेरे ये सिद्धांत...बहुजन सुखाय, बहुजन हिताय...यानी सर्वोदय का सिद्धांत...जीओ और जीने दो...फिर देखों जिंदगी की राह कितना आसान हो जाती है....एक बात मैं साफ कर देना चाहता हूं कि मैं भौतिक समृद्धि के खिलाफ नहीं हूं...और ना मैं मशीनों के इस्तेमाल को नकारता हूं...मैं तो बस इतना ही चाहता हूं कि मशीनों का दास मत बनो...मशीनें तुम्हारे लिए होनी चाहिए ना कि तुम मशीनों के लिए...शायद तुम्हें याद हो...एक बार मैंने कहा था कि
आर्थिक समानता अहिंसक स्वतंत्रता की असली चाबी है...शासन की अहिंसक प्रणाली कायम करना तब तक संभव नहीं है...जब तक अमीरों और करोड़ों भूखे लोगों के बीच की खाई बनी रहेगी
शायद तुमने इस बात का मतलब दूसरा ही निकाल लिया...तुमने तो उस खाई को और बढ़ा दिया है....गांवों के हालात तो और खराब होते जा रहे हैं...गांवों के लोग शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं....शहर गरीबों को आसरा देने से इनकार कर रहा है....भूख से लोग बिलबिला रहे हैं....अमीर पहले से और अमीर हो गया है....क्या मुझे इतना भी हक नहीं है कि मैं तुमसे ये पूछ सकूं....क्यों मेरे सपने के भारत को बर्बादी के कगार पर ले जाने में तुले हो...

Thursday, January 20, 2011

फेरबदल का फरेब

किस किस अदा से तूने जलवा दिखा के मारा, आजाद हो चुके थे...बंदा बना के मारा....कुछ इसी तरह का हाल इस बार मनमोहन की पुरानी टीम के साथ भी हुआ...गनीमत ये रही कि इसमें मार हल्के से पड़ी....बल्कि यूं कहे कि जिन्हें मंत्रालय की समझ नहीं थी....और जिन्होंने अपने मंत्रालयों की जिम्मेदारी ठीक से नहीं समझी...उन्हें भेज दिया गया दूसरे मंत्रालय में....रणनीति ये भी थी कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घिरे मंत्रियों का विभाग बदलकर विपक्ष को चित्त कर दिया जाए...लेकिन सरकार को कौन समझाए कि चेहरे बदलने से दाग नहीं धुलते....बहरहाल जिन दिग्गजों का बोझ घटाया गया....और दूसरे मंत्रालयों में भेजा गया...उनमें पहला नाम खेलमंत्री रहे एमएस गिल साहब का आता है...कॉमनवेल्थ खेलों में भ्रष्टाचार की मार झेल रहे गिल साहब को सांख्यिकी एवं योजना कार्यान्वयन मंत्रालय देकर दाग-दाग उजाला करने की कोशिश की गई है.....इसी तरह कॉमनवेल्थ खेलों में नाकामियों की वजह से सुर्खियां शहरी विकास मंत्री रहे जयपाल रेड्डी को भी चलता कर दिया गया...वहीं ग्रामीण विकास मंत्रालय संभालने में फिसड्डी साबित हुए सीपी जोशी को सड़क एवं परिवहन मंत्रालय थमा दिया गया....इसी तरह पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा की कार्यप्रणाली रास नहीं आया...तो उन्हें भी कॉरपोरेट डिपार्टमेंट में भेज दिया गया...वैसे भी मुरली देवड़ा साल में सात बार पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत में इजाफा कर अपनी नाकामी साबित कर दी थी....सड़क एवं परिवहन मंत्री कमलनाथ एक दिन में बीस किलोमीटर सड़क बनाने चले थे...लेकिन उनकी मेहरबानी से एक दिन में सात किलोमीटर भी सड़कें बनाने में पसीना आ जाता था....यही नहीं योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहुलवालिया के साथ भिड़ना भी उन्हें मंहगा पड़ गया...इसलिए उनको भी खोमचे में ढकेल दिया गया....चलिए बात उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल की भी कर ली जाए....वे ठहरे सहयोगी दल के मंत्री...और सरकार उन्हें उंगली तो दिखाने से रही.... इसलिए सस्ता और आसान तरीका यही था कि उन्हें प्रमोट कर कैबिनेट मंत्री बना दिया गया...दरअसल प्रफुल्ल पटेल खुद भी चाहते थे कि उनका मंत्रालय बदल दिया जाए....और उन्हें कैबिनेट का दर्जा दिया जाए.....प्रफुल्ल पटेल अपने मंत्रालय की वजह से कई बार सुर्खियों में रहे....उनके कार्यकाल में एयर इंडिया लगातार घाटे की मार झेलती रही....इस वजह से सरकार की मंशा भी उन्हें उड्डयन मंत्रालय से बेदखल करने का भी रहा होगा...जाहिर है सरकार काम में फिसड्डी साबित मंत्रियों को दूसरे मंत्रालय में भेजकर पुरानी बोतल में नई शराब पेश की है 

Monday, December 13, 2010

इस खेल के भी सरताज

 ये खेल सदियों पुराना है । लेकिन बीते दशक से इस खेल में रवानीगी आई है । चमक बढ़ी है....दौलत बढ़ी है। खास बात, ये खेल पर्दे के पीछे से खेला जाता है। टेबल के नीचे से अंजाम दिया जाता है। मेहनत और ईमानदारी इससे दूर भागती है। बेगैरत और फरेब इसका संविधान है। चलिए, तो पर्दे के पीछे खेले जाने वाले इस खेल से पर्दा उठा ही देते हैं । जी हां हम बात कर रहे हैं देश में बढ़ रहे भ्रष्टाटाचार और रिश्वतखोरी की। हमारे देश में भ्रष्टाचार गरीब के हिस्से को डकार जाता है। और रिश्वतखोरी उस हिस्से को विधिसम्मत बना देता है। अब सवाल ये है कि लोकतंत्र को खोखला करने वाली इन दोनों बीमारियों को पनाह कौन देता है। ..जाहिर है आपके दिमाग में अलग-अलग शख्सियतों की तस्वीर उभरेगीं। .उनमें नौकरशाह भी होंगे और आपके जनप्रतिनिधी भी। .समस्या की गंभीरता का अंदाजा लगाइए। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को कहना पड़ गया था, रुपये का मात्र पंद्रह पैसे ही आम आदमी तक पहुंच पाता है। .ये कहना गलत नहीं होगा कि हमारा देश भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा हुआ है। .चारा घोटाला से लेकर कफन घोटाला तक, भूसा घोटाला से लेकर खाद घोटाला तक। लेकिन ये उदाहरण पुराने पड़ चुके हैं। जमाना बदल चुका है। भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के तरीके भी बदल गए.। अब इसकी कोख से अखंड प्रताप सिंह, नीरा यादव, अरविंद जोशी और टीनू जोशी जैसे नौकरशाह पैदा होते हैं। अपने ही देश को खोखला करने वाले रविइंदर सिंह जैसे गद्दार पैदा लेते हैं। जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले ए राजा पैदा होते है। खेल में खेल करने वाले कालमाडी पैदा होते हैं। अब घोटाला नहीं महाघोटाला होता है। कॉमनवेल्थ महाघोटाला, टूजी स्पेक्ट्रम महाघोटाला, लवासा महाघोटाला, आदर्श सोसायटी महाघोटाला, खाद्यान्न महाघोटाला, आवास ऋण घोटाला। करो तो कुछ बड़ा करो, शायद यही भ्रष्टाचारियों का टैग लाइन है। अब बात जरा इससे हटकर। 9 दिसंबर को पूरी दुनिया ने विश्व भ्रष्टाचार निरोधक दिवस मनाया। इस मौके पर भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाने वाली संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट आती है, उसमें भारत को दुनिया के सबसे ज्यादा भ्रष्ट देश करार दिया गया है। खास बात ये कि हमारे नेता इसमें सबसे आगे हैं.। इसके बाद नौकरशाह का नंबर आता है, जिसमें पुलिस भी शामिल है। और आखिर में भ्रष्टाचार की हद पर मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी की टिप्पणी- आखिर अदालत से क्यों छूट जाते हैं चुनाव लड़ने वाले अपराधी...और जीवन भर क्यों सड़ते रह जाते हैं हमारे देश में मौजूद ढाई करोड़ कैदी। www.facebook.com

Monday, June 28, 2010

सिब्बल की अनोखी पहल


आजादी सपनों की...आजादी सोचने की...आजादी बोलने की...और आजादी लिखने की....तो फिर पढ़ने की आजादी क्यों नहीं....पढ़ाई क्यों है सब्जेक्ट्स के गुलाम....सब्जेक्ट्स में क्यूं बंटा है स्ट्रीम....और फिर, मुझे केमिस्ट्री के साथ हिंदी पढ़ना पसंद है तो क्यों कतर दिए जाते हैं मेरी पसंद के पंख....क्यों चढ़ा दी जाती है मेरी पसंदों की बलि....क्यों कर दिए जाते हैं मजबूर...नापसंद को भी पसंद बनाने के लिए.....ये कुछ सवाल है...सवाल में दम है...और सवाल में ही सवाल है...सवाल आजादी का है...सवाल अपनी अपनी पसंद का है...सवाल अपने अपने इंटरेस्ट का है....माना इंजीनियर बनने के लिए फिजिक्स कैमिस्ट्री के साथ मैथेमैटिक्स की पढ़ाई बेहद जरूरी है....पर सच्चाई ये भी है कि सुकून के लिए साहित्य भी उतना ही जरूरी है....जहां बात नापसंदगी की हो तो छींके तो आएगी ही....जोर जबरदस्ती से इंजीनियर तो बनाया जा सकता है....पर नापसंदी के कांटे भी जीवन भर चुभते रहते हैं....सब्जेक्ट्स कहीं बोझ ना बन जाए...इसलिए समय के साथ बदलाव भी जरूरी है...वाकई मानव संसाधन मंत्रालय की पहल अनोखी है..मानव संसाधन विकास मंत्रालय दसवीं पास छात्रों को आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस के विषयों को एक साथ अपनाने की छूट देने पर विचार कर रहा है। इस संबंध में मंत्रालय ने स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के संयुक्त सचिव एससी कुंतिया की अध्यक्षता में दस सदस्यों की एक समिति भी बनाई है। समिति गठित की है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अध्यक्ष विनीत जोशी को समिति का संयोजक बनाया गया। यह समिति हायर सेकंडरी और ग्रेजुएट स्तर पर छात्रों को विभिन्न क्षेत्रों के विषय लेने की अनुमति देने के संबंध में अपना सुझाव देगी..यह समिति विभिन्न बोर्ड से उत्तीर्ण हुए छात्रों की तुलना करने की प्रक्रिया के बारे में भी सुझाव देगी। मामले में, विशेषज्ञों का मानना है कि इस पद्धति को लागू करने पर विद्यार्थियों के मूल्यांकन और विभिन्न बोडरें की परीक्षा प्रणाली में काफी विसंगतियां हैं। ऐसे में यह समिति विभिन्न बोर्ड की परीक्षा प्रणाली का अध्ययन करेगी फिर अंतर बोर्ड के तुलनीय परिणामों की प्रक्रिया के बारे में सुझाव देगी। .इतिहास और वर्तमान दोनों को एक साथ पलटने की तैयारी चल रही है...समिति गठित कर दी गई है...इंतजार है तो बस समिति के आए रिपोर्ट्स का...जो कि सितंबर तक आने की उम्मीद जताई जा रही है....समय सीमा भी वही तय की गई है....निश्चित ही कपिल सिब्बल की प्रयास सराहनीय है....उम्मीद है कि वो भी जल्द आ जाएगी....और मंत्रालय की सोच आकार भी ले लेगी....तो तैयार रहिए साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स का एक साथ मजा उठाने के लिए

Saturday, June 26, 2010

ये पब्लिक है...सब जानती है

विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए..शनिवार की सुबह जब आंखे खुली तो अखबारों में सबसे पहले इसी विज्ञापन पर नजर जा ठहरी...तेल की कीमतों में आग लगाने के बाद अब सरकार लोगों से सहयोग मांग रही है....इस विज्ञापन में पड़ोसी देशों का आंकड़ा पेश कर देश के आम आदमी को आईना दिखाने की कोशिश की गई है....पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी इस विज्ञापन में सरकार खुद को बचाती नजर आई...हवाला दिया गया पड़ोसी देशों का...और ये भी कि कीमते बढ़ने के बावजूद एलपीजी पर 225 रुपये और मिट्टी तेल पर 16 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है.... ये दिखाने की कोशिश की गई है कि देश में एलपीजी और केरोसीन की कीमत पड़ोसी देशों के मुकाबले काफी कम है....पड़ोसी देशों के मुकाबले यहां एलपीजी और मिट्टी तेल की कीमत कुछ भी नहीं....पर ये पूरा सच नहीं है....इस विज्ञापन में पेट्रोल और डीजल की कीमतों के बारे में कहीं भी जिक्र नहीं......क्योंकि सरकार को भी पता है कि पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देश में...भले ही एलपीजी और केरोसिन की कीमते भारत के मुकाबले ज्यादा हो...लेकिन पेट्रोल और डीजल की कीमतें वहां काफी कम हैं..भारत में जहां पेट्रोल की कीमत बढ़कर 51.43 रुपए प्रति लीटर हो गई है...वहीं पाकिस्तान में मौजूदा कीमत 39.70 और श्रीलंका में 25.76 रुपये प्रति लीटर है....यानी कि भारत में पेट्रोल-डीजल की मौजूदा कीमत पाकिस्तान और नेपाल से काफी ज्यादा है....सरकार इसी बात को साफ छुपा गई है...ताकि लोगों को लगे कि उसने पेट्रो पदार्थों की कीमतों में इजाफा कर कोई गुनाह नहीं किया है...सवाल ये है कि जब पाकिस्तान और नेपाल जैसे देश इतनी कम कीमत पर लोगों को पेट्रोल-डीजल मुहैया करा रहे हैं तो फिर भारत क्यों नहीं...जिस अर्थव्यवस्था को बचाने की दुहाई दी जा रही है...क्या वो हमारे पड़ोसी देशों से भी कमजोर हो गई है....जाहिर है कहीं ना कहीं सरकार की नीति में ही खोट है....हमारी तो यही गुजारिश है कि आम आदमी के साथ रहने का दावा करने वाली यूपीए सरकार कम से कम जनता को तो बेवकूफ नहीं बनाए...क्योंकि ये पब्लिक सब जानती है

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