यु तो कहने को बहुत है
पर किस से कहू
तेरी इस बेरुखी को में मुहब्बत समझू या समझू बेवफाई तेरी याद जब भी आई मेरी आँख भर आई
जब से तुम नही मिले हम से उदासी हैं छाई टरी याद जब भी आई मेरी आँख भर आई
वजह क्या हैं न मिलने की हमसे वक्त की कमी या कोई कमी मुझमे पाई तेरी याद जब भी आई मेरे आँख भर आई
तुम नही चाहते हो मिलना तो हम भी कोशिस करेंगे न मिलने की
दूर अब तुम से रहेंगे ना पड़ने देगें अपनी परछाई तेरी याद जब भी आई मेरी आंख भर आई
वंदना त्यागी की कलम से
Tuesday, May 12, 2009
Thursday, April 16, 2009
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