Tuesday, July 7, 2009

महेंद्र सिंह धोनी भारतीय क्रिकेट का जगमगाता सितारा जो बहुत ही कम समय में आसमान के बुलंदियों को छू लिया ...धोनी ने राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट दोनों में अपनी एक अलग पहचान बनाई...धोनी की बात हो और फैशन का जिक्र ना हो...हो नहीं सकता...क्योंकि माही और स्टाइल एक दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। धोनी की हर बात अव्वल है और हर स्टाइल धोनी के लिए अव्वल । रांची का ये युवराज अपने स्टाइल के लिए भी उतना ही जाना जाता है जितना कि क्रिकेट के लिए। धोनी नए भारत की नई सोच की नुमाइंदगी करते है। माही के नाम से मशहूर धोनी दूसरों से जरा हटकर है। धोनी के शॉट्स और कप्तानी में भी स्टाइल नजर आता है। उनके हेयर स्टाइल इंडियन यूथ के ब्रांड भी बने। धोनी अपने लुक बदलने में भी माहिर हैं। पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के साथ सात मैचों की वनडे सीरीज और एक ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच खेलने के बाद जब धोनी अपने गृहनगर पहुँचे तो एक नया ही अंदाज़ देखने को मिला। इस बार धोनी के लंबे बड़े बाल कट गए थे और उसकी जगह करीने से कटे हुए छोटे बाल दिख रहे थे. आँखों पर धूप का चश्मा चढ़ाए और 'अरमानी' की डिज़ाइनर टी-शर्ट पहने धोनी पहले के धोनी से बिलकुल अलग नज़र आ रहे थे। उस धोनी से बिलकुल अगल जिसके लंबे बालों के मुरीद पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ भी हो गए थे। उनके स्टाईल को लेकर उस समय के रेल मंत्री लालू यादव ने कह डाला कि धोनी क्रिकेट से ज्यादा ध्यान अपने बालों पर देते है.। ये तो हुई बालो की बात। अब चर्चा उनके बाईक प्रेम की। धोनी का बाईक प्रेम जगजाहिर है। रांची का ये राजकुमार जब अपने शहर में होता है तो वहां की सड़कों पर सरपट बाइक दौड़ाते नजर आता है। उनकी रफ्तार कभी कभी 180 किलोमीटर पर ऑवर की रफ्तार भी छूने लगती है। उनके पास दो चार नहीं कुल 23 बाईक है। बहुत कम लोगों को पता होंगा कि सेंट्रल कोलफिल्ड में नौकरी के दौरान पहली तनख्वाह में मिले 22 सौ रुपये से एक पुरानी बाईक खरीदी थी। इंडियन क्रिकेट के इस सितारे के पास अभी 650 सीसी यमहा थंडरबर्ड, एक आरडी 350,एक बुलेट मेकिज्मो, एक सीबीजेड और एक मशहूर कंपनी के गिफ्ट में दिए गए एक बाईक जिसकी कीमत लाखों में है। अब सुजुकी की हायाबूसा और यामाहा की एम टी-01 भी धोनी के बेड़े में शामिल हो गई है। इसके अलावा उनके पास दे एसयूवी भी है..जो उनके बाईक प्रेम को दर्शाती है।

Tuesday, May 12, 2009

यु तो कहने को बहुत है
पर किस से कहू
तेरी इस बेरुखी को में मुहब्बत समझू या समझू बेवफाई तेरी याद जब भी आई मेरी आँख भर आई
जब से तुम नही मिले हम से उदासी हैं छाई टरी याद जब भी आई मेरी आँख भर आई
वजह क्या हैं न मिलने की हमसे वक्त की कमी या कोई कमी मुझमे पाई तेरी याद जब भी आई मेरे आँख भर आई
तुम नही चाहते हो मिलना तो हम भी कोशिस करेंगे न मिलने की
दूर अब तुम से रहेंगे ना पड़ने देगें अपनी परछाई तेरी याद जब भी आई मेरी आंख भर आई
वंदना त्यागी की कलम से

Thursday, April 16, 2009

मैं नही जनता की इस चुनाव में मेरा गाँव किस तरह से नेताओ को झेल रहा होगा पर इतना जानता हु की

ji

aaj kal kuch soch kar v kuch kah nahi paata hu..mai iska vajah v nahi janta.

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