Friday, March 25, 2011
लैपटॉप लो, वोट दो
लगभग ढाई हजार साल पहले ग्रीक फिलॉस्फर अरस्तू ने आशंका जाहिर की थी कि लोकतंत्र भीड़तंत्र में तब्दील हो सकता है....राजनेता लोगों को लालच देकर बरगला सकते हैं...पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में ग्रीक फिलॉस्फर की आशंका सही साबित होती दिख रही है.....अगर आप तमिनाडु के या फिर केरल के मतदाता हैं...तो ये दिल मांगे मोर कहने से कतई गुरेज नहीं करेंगे...बात ही ऐसी है....क्योंकि इन राज्यों के राजनीतिक पार्टियों ने कहा है कि गिफ्ट लो और वोट दो...जी हां, वोट दो और नोट लो की बातें अब पुरानी पड़ गई है....इसलिए अब बात हो रही है वोट दो और लैपटॉप लो.....वोट दो और फ्रीज लो...वोट दो और मंगलसूत्र लो.....ये नए जमाने के लुभावने और चुनावी नारे हैं....मासूम जनता को छलने के लिए और ठगने के लिए ताजातरीन रिश्वत है....अब ये जनता की विवेक पर निर्भर है कि एक अदना सा वोट के बदले उसे क्या चाहिए....सड़क, बिजली और पानी का आश्वासन चाहिए या फिर ठंडा पानी पीने के लिए फ्रीज....पेट में अन्न का दाना भले ही नहीं हो....लेकिन उंगलियों को लैपटॉप पर घूमाने के लिए पूराका पूरा भरोसा....पीने के लिए नल से पानी नहीं आता हो...लेकिन चिंता की कोई बात नहीं....नेताजी अगर सत्ता में आ गए तो सबको मिलेगा मिनरल वाटर...कितने दिनों तक फिलहाल पता नहीं....चलिए अब आते हैं असली बात पर....चुनावी मौसम आ गया है...इसलिए नेताओं में भी गिरगिट की तरह रंग बदलने की होड़ सी मच गई है...महत्वकांक्षाएं दुबारा कुलांचे मारने लगी है... पांच साल तक सत्ता से चिपने रहने और भ्रष्टाचार में नाक तक डूबे रहने के सपने आंखों में तैरने लगे हैं....अगले महीने तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव है...इसलिए राजनीतिक पार्टियों के नए पैतरें शुरु हो चुके हैं....सबसे पहला दांव चला मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने....फिर से सत्ता को हासिल करने के लिए उन्होंने घोषणा की...अगर उनकी पार्टी सत्ता में लौटते हैं तो वे छात्रों को लैपटॉप मुफ्त में बाटेंगे.....महिलाओं के लिए भी चारा फेंकने में कोई हिल हुज्जत नहीं की....और उनको दिया जाएगा मुफ्त में मिक्सर ग्राइंडर...साथ में 35 किलो चावल फ्री....अब भला अम्मा यानी की जयललिता कहां चूकने वाली थी...सो उन्होंने भी अपना ट्रंप कार्ड फेंका....उनका पैंतरा अपने प्रतिद्वंद्वी करुणानिधि से थोड़ा सा दमदार था....उन्होंने महिलाओं का नब्ज पकड़ते हुए उनके लिए मंगलसूत्र और चालीस ग्राम सोना मुफ्त देने का वादा किया....बीपीएल परिवारों के लिए मिनरल वाटर, ग्यारहवीं और बारहवीं के छात्रों के लिए लैपटॉप और साथ ही गरीबों के लिए 20 किलो अनाज मुफ्त मुफ्त मुफ्त....अब जरा इस राज्य से इतर केरल पर नजर दौड़ाते हैं....लोकतंत्र का मजाक उड़ाने में यहां के राजनीतिक दल भी पीछे नहीं है....कांग्रेस नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंड ने चुनावी जीत होने पर 36 लाख नौकरियां, बीपीएल परिवारों के लिए एक रुपये प्रति किलो चावल और दसवीं के छात्रों के लिए मुफ्त में साइकिल देने का चारा फेंका है.....पश्चिम बंगाल में ममता अभी तक कांग्रेस से समझौते में लगी थीं....वो तो हो गया....अगर वो भी कोई नई तान छेड़ दें तो आश्चर्य नहीं....रही बात असम और पुडुचेरी की तो वहां का पूरा परिदृश्य ही अलग है...जरा सोचिए लोकतंत्र का इससे बड़ा भद्दा मजाक क्या हो सकता है....जहां जनता की वोट को बिकाउ करार दिया जाता है...जहां के कानून को ताक पर रखकर लोगों को रिश्वत खिलाई जा रही है...आखिर क्यों नहीं...एक बार रिश्वत खिलाओ...और पूरे पांच साल तक रिश्वत बटोरो...लोकतंत्र के इन पहरुओं के पास जनता की बुनियादी जरूरतों की कोई फिक्र नहीं है....फिक्र है तो सिर्फ और सिर्फ सत्ता से जन्म जन्मांतर तक चिपके रहने की...ताकि उनकी आने वाली कई पीढ़ियों का फ्यूचर संवारा जा सके....जनता जाए भाड़ में...काहे का जनता जनार्दन....काहे का लोकतंत्र
Saturday, March 5, 2011
ड्राइविंग सीट पर अदालत
इस देश में कितने गरीब...खाने के लिए दो वक्त की रोटी नहीं, तन ढकने के लिए कपड़े नहीं और सिर छुपाने के लिए छत नहीं....योजनाएं बनती है गरीबों के लिए, लेकिन तिजोरी भरती है अमीरों की...गरीब और भी गरीब....अमीर और भी अमीर, इतना अमीर कि उसे अपनी दौलत दौलत छुपाने के लिए देश में जगह कम पड़ जाती है...मजबूरन उसे अपनी दौलत विदेशों में रखनी पड़ती है....जहां उसपर किसी की भी नजर ना पड़े....और हमारे देश का कानून तो देखिए.....कानून कहता है, चोर की जगह सलाखों के पीछे होना चाहिए....होता भी है...बल्कि खूब होता है....कोई किसी का जेब तराश ले, तो सड़ो छह महीने जेल में...किसी का माल उड़ा लिए, तो सलाखों से कोई नहीं बचा पाएगा....और तो और, कोई आम आदमी सरकार के हजार दो हजार रुपये टैक्स चुरा लिये....तो उसे भी थमा दी जाती है कानूनी नोटिस, जुर्माना भरो....या फिर जाओ जेल में....आखिर क्यों नहीं अपराधी जो ठहरा....लेकिन जरा सोचिए....अगर किसी को हजार दो हजार के लिए जेल मिल सकती है....तो सरकार के हजारों करोड़ रुपये चुराने वालों का क्या हश्र होना चाहिए....अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है....लेकिन इस देश में ऐसा कुछ नहीं होता....कानून तो छोटे मोटे अपराधियों के लिए ही होता है....बड़े अपराधियों तक वो पहुंच ही पाता...अगर पहुंच भी जाता है, तो कानून का पालन कराने वाले उसका गिरेबान पकड़ने के बजाय, उसके आगे दुम हिलाते नजर आते हैं....यही हमारे देश की तकदीर है....यही हमारे देश की तस्वीर है....हम आपको मिलाते हैं एक ऐसे ही शख्सियत से....ये हैं हसन अली....सैयद मोहम्मद हसन अली खान....पुणे में स्टड फॉर्म चलाते हैं.... हवाला कारोबार और मनी लॉंडरिंग के जरिए अकूत दौलत बनाई...अरबो डॉलर विदेशी बैंकों में जमा किए...एक अनुमान के मुताबिक करीब 8 अरब डॉलर.....लेकिन देश में इन्होंने अपनी कमाई पर कोई टैक्स नहीं चुकाया....1999 से ही कोई टैक्स जमा नहीं की....देश का पैसा चुराकर विदेशों में रख दिया....लेकिन सरकार ने इनपर शिकंजा कसने की कतई जरूरत नहीं समझी.....सरकार की नींद खुली जब काले धन को लेकर हो हल्ला मचने लगा...इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और प्रवर्तन निदेशालय सक्रिय हुआ....हालांकि आयकर विभाग ने 31 दिसंबर 2008 को नोटिस जारी कर, विदेशी बैंकों में जमा रकम का खुलासा नहीं करने के आरोप में 40 हजार करोड़ रुपये बतौर टैक्स की मांग की थी...लेकिन ये मांग सिर्फ नोटिस तक ही सीमित रही....पैसे वसूलने के लिए कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई...कोई कार्रवाई नहीं की गई....कभी कभी छापेमारी का दौर चलता रहा...लेकिन बात इससे आगे नहीं बढ़ी....कहा गया कि वो देश से फरार हो चुका है....लेकिन कहने वाले कहते रहे...देखने वाले देखते रहे...कि इस दौरान हसन अली भारत में ही मौजूद रहा....इनकम टैक्स के समन जारी करने के बाद हसन अली आईटी के सामने पिछले महीने के 18 तारीख को पेश हुआ...पूछताछ हुई लेकिन गिरफ्तारी नहीं की गई...जाहिर है सरकार इस मामले में ढीला रवैया अपनाती रही है....आखिरकार सरकार के इस रवैये से तंग आकर सुप्रीम कोर्ट को ही आगे आना पड़ा...इस मसले पर 3 मार्च यानी गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को तगड़ी फटकार लगाई...और सरकार से सवाल पूछा कि आखिर किन वजहों से हसन अली को गिरफ्तार नहीं किया गया....और क्या आजादी सिर्फ ऐसे ही लोगों के लिए है....इसी तरह सीवीसी पीजे थॉमस की नियुक्ति को अवैध ठहराकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार पर सवालिया निशान लगा दिया....सवाल उठता है...कि क्या सरकार को उसकी जिम्मेदारी का एहसास दिलाने के लिए अदालतों को ही आगे आना पड़ेगा....क्या सरकार का काम सिर्फ शासन करना भर रह गया है....जिस काम को सरकार को करना चाहिए था...उस काम को अदालतें करेंगी....अब तो लोग सरकार से उम्मीदें कम....अदालतों से ज्यादा करने लगे हैं....आखिर ऐसा क्यों
Wednesday, March 2, 2011
अमेरिका में दाडी यात्रा-2
12 मार्च 1930...भारतीय इतिहास का यादगार दिन.....इसी दिन महात्मा गांधी ने मात्र 78 स्वयंसेवकों के साबरमती आश्रम से दांडी यात्रा शुरु की थी....शुरुआती दौर में ब्रिटिश हुकुमत के लिए भले ही ये पहले लगी हो....कि जिस यात्रा का अंत सिर्फ नमक बना कर खत्म होता हो...उससे ब्रिटिश सम्राज्य को क्या खतरा हो सकता है....लेकिन जल्द ही अंग्रेजों को एहसास हो गया कि ये सिर्फ यात्रा ही नहीं....बल्कि एक मुट्ठी नमक बनाकर ब्रिटिश हुकुमत से अंहिसापूर्वक लड़ने के लिए करोड़ों भारतीयों के दिलों में विश्वास पैदा करना भी था....6 अप्रैल 1930 को दांडी यात्रा खत्म होते होते ये यात्रा एक जन आंदोलन का रुप पकड़ चुकी थी....आज दांडी यात्रा का एक बार फिर जिक्र आ रहा है...और इस बार ये जिक्र भारत से नहीं बल्कि एक परायी धरती से निकलकर सामने आ रहा ...वो भी भारत के लिए....अंग्रेजों से लड़ने के लिए नहीं....बल्कि भारत में फैले भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए...जी हां....अमेरिका में अप्रवासी भारतीयों के एक समूह ने अमेरिकी धरती पर एक दांडी यात्रा शुरु करने का फैसला किया है...ये यात्रा भी उसी तारीख से शुरु होगी...जिस दिन महात्मा गांधी ने शुरु किया था...यानी 12 मार्च....दांडी की तरह इस यात्रा में भी 240 मिल पैदल ही दूरी तय की जाएगी....यात्रा की शुरुआत कैलिफोर्निया के सेन डियोगो स्थित मार्टिन लूथर किंग जूनियर मेमोरियल पार्क से होगी.....और लॉस एंजिल्स होते हुए 26 मार्च को सन फ्रांसिस्को स्थित गांधी मूर्ति के पास खत्म होगी....भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरु हो रही इस दांडी यात्रा दो में अमेरिका के सभी बड़े शहरों के अप्रवासी भारतीयों के अलावा...भारत के 10 शहरों और दुनिया भर के 8 देशों से लोग हिस्सा लेंगे....इस यात्रा के आयोजकों के मुताबिक दांडी यात्रा दो का मकसद भारत को भ्रष्टाचार से निजात दिलाना है....साथ ही भारत की सरकार को जनलोकपाल बिल और यूनाइटेड नेशन कंन्वेंशन अगेंस्ट करप्शन का अनुमोदन करना है....इस दांडी यात्रा दो में भारत के कई संगठनों का भरपूर समर्थन मिल रहा है...जिनमें से एंटी करप्शन मूवमेंट के अलावा लोकसत्ता पार्टी, इंडिया अगेंस्ट करप्शन, द फिफ्थ पिलर, यूथ फॉर बेटर इंडिया, साकू और सेव इंडिया करप्शन शामिल है
Saturday, February 19, 2011
जेपीसी पर दांवपेंच
खूब हो हल्ला मचा, खूब बयानबाजी हुई...सरकार अपनी जिद पर अड़ी रही...तो विपक्ष अपना राग अलापता रहा...पूरा शीतकालीन सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया...जनता की गाढ़ी कमाई बर्बाद होती रही...और सरकार तमाशा देखती रही...लेकिन लगता है कि अब सरकार को भी होश आ गया है....कहीं तीन महीने तक चलने वाला बजट सत्र भी खाक ना हो जाए...इसलिए टूजी स्पेक्ट्रम पर जेपीसी गठन को लेकर सरकार की तरफ से सुगबुगाहट भी तेज हो गई है...इसका संकेत तो शुक्रवार को ही संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने दे दिया था...जाहिर है सरकार भी पूरी तरह मन बना चुकी है...कि जेपीसी के गठन किए बिना बजट सत्र नहीं चलने वाला...लेकिन ऐसा भी नहीं कि सरकार ने विपक्ष के आगे घुटने टेक दिए हो....क्योंकि जेपीसी का गठन का दायरा सिर्फ टूजी स्पेक्ट्रम तक सीमित होगा...यानी कि दूसरे मामलों को इसके तहत लाने के लिए विपक्ष की मांग पर विचार ही नहीं किया जाएगा....जेपीसी गठन के बाद ही सरकार गेंद को अपने ही पाले में रखना चाहती है...और इसके लिए, गठन से पहले ही इसकी काट भी तलाशनी शुरु कर दी है...वजह साफ है...अगर समिति बनती है तो इसमें कांग्रेस का पलड़ा दूसरी पार्टियों के मुकाबले कम होगा....क्योंकि लोकसभा में इस वक्त 37 पार्टियां हैं....लेकिन जेपीसी में केवल 8 या 9 पार्टियों को ही जगह मिल पाएगी....इसमें से ज्यादातर सदस्य टूजी स्पेक्ट्रम पर सवाल उठाने वालों में से होंगे...यानी की कांग्रेस और उसके सहयोगी दल किसी भी कीमत पर जेपीसी में अलग थलग नहीं पड़ना चाहते...जाहिर है अगर सरकार को दूसरे दलों से इस मुद्दे पर समर्थन हासिल हो जाता है....तो अपना वर्चस्व कायम रखने में भी सहूलियत होगी....और इसके लिए सरकार ने कवायद भी शुरु कर दी है...गृहमंत्री पी चिदंबरम से समाजवादी पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव की शुक्रवार को हुई मुलाकात भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा..फिलहाल सोमवार से शुरु होने वाले बजट सत्र के पहले दिन इस पर चर्चा कराए जाने की संभावना है...और इसके अगले दिन यानी कि 22 फरवरी को सरकार लोकसभा में जेपीसी का प्रस्ताव पेश कर सकती है
Friday, February 11, 2011
'शक्ति' पर कहर
इस देश की अजब ही बिडंबना है....अजीब है इस देश में सबकुछ....जहां की उच्च सत्ता पर महिलाओं का कब्जा हो...वहां की महिलाएं सुकुन की जिंदगी से कोसों दूर हैं...हर पल खौफ में जीने को मजबूर है देश की आधी आबादी....यहां तो हर आधे घंटे के दौरान महिलाओं की इज्जत को तार-तार कर दिया जाता है...हर तीन मिनट पर उन्हें अपराध का शिकार बनाया जाता है....क्या ये एक लोकतंत्र के लिए शर्मनाक नहीं है....समानता के अधिकार का मजाक नहीं है...दर्द तो इस बात का है कि आज उच्च पदों पर बैठे लोग भी इस कड़वी हकीकत से नजरे चुराते नजर आते हैं...दर्द एक और है....और उस दर्द का रिश्ता हमारे उपराष्ट्रपति की पत्नी से है...जो खुद को मजबूर पाती हैं...बेबस पाती हैं....और आखिर में अपने उस दर्द को बेहद ही खौफनाक शब्दों में बयां करती है....तो क्या ये समझा जाए कि आधी आबादी की जिंदगी जलालत बन चुकी है...और अत्याचार उनकी किस्मत.. शुक्रवार शाम होते होते देश के अलग-अलग इलाकों से कई खबरें आती है....और ये खबरें महिला अस्तित्व से जुड़ी हुई होती है....उन खबरों के पीछे पुरुष की उस घिनौनी मानसिकता भी नजर आती है....जिसके तहत वो महिलाओं को सदियों से गुलाम मानता आया है....नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से एक बैग में महिला की लाश मिलती है...और देखते ही देखते सनसनी फैल जाती है....लखनऊ में एक युवक अपनी बाइक पर एक बारहवीं की छात्रा को बिठाना चाहता है...लेकिन वो लड़की बाइक पर बैठने से मना कर देती है...गुस्से में लड़का उस पर गोलियां दाग देता है....मध्यप्रदेश के जबलपुर में लड़की ने छेड़छाड़ से मना किया तो उसे जिंदा आग के हवाले कर दिया गया...ये सिर्फ एक दिन की खबरें हैं...पूरे महीने पर नजर डालेंगे तो तस्वीर और भयावह नजर आएगी...और पूरे साल की तो बात ही मत कहिए...हो सकता है आप ये कहने को मजबूर हो जाएं कि इस देश का तो भगवान ही मालिक है...
हर 3 मिनट पर 1 महिला होती है अपराध की शिकार
हर 9 मिनट पर पति या रिश्तेदारों की क्रूरता की शिकार
हर 29 मिनट में 1 महिला होती है रेप की शिकार
हर 77 मिनट पर दहेज हत्या का 1 मामला
हर 240 मिनट पर 1 महिला करती है खुदकुशी
चौंकिए मत...ये उसी भारत की भयावह तस्वीर है...जहां नारी को देवी स्वरूपा माना गया है...ये उसी भारत की तस्वीर है जहां के लोकतंत्र की गाथा पूरी दुनिया गाती है...ये उसी भारत की तस्वीर है जहां के राष्ट्रपति खुद एक महिला है...संसद की अध्यक्षता एक महिला ही करती है...देश की सत्ता पर काबिज यूपीए अध्यक्ष भी एक महिला ही है और सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश की सत्ता भी एक महिला के हाथों में हैं....सुनने में भले ही ये सुखद लगे कि देश की उच्च सत्ता पर महिलाएं विराजमान हैं...उम्मीद की जा सकती है कि उस देश की महिलाओं की जिंदगी खुशहाल, उम्मीदें जगाने वाली और सतरंगी सपनों से लबरेज हो....लेकिन जब असलियत सामने आती है तो कलेजा मुंह को आ जाता है....जरा इस तस्वीर के एक और पहलु को भी देख लीजिए....शुरुआत करते हैं उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी के उस बयान से...जिसमें दर्द भी है...हमारी व्यवस्था को लेकर हताशा भी है और कड़वी हकीकत भी... लेकिन इस बयान पर बवाल खड़ा करने के बजाय गौर करने की जरूरत है....आखिर क्यों इस देश के उपराष्ट्रपति की पत्नी को कहना पड़ा कि बेटियों को पैदा होते ही मार दो...ताकि उन्हें बलात्कार जैसी घिनौनी करतूतों का शिकार ना होना पड़े....देश में महिलाओं के हालात क्या है ये किसी से छिपा भी नहीं है...घर के दहलीज से लेकर बाहर सड़क तक...हर जगह करनी पड़ती है आबरू की हिफाजत के लिए जद्दोजहद....खैर अब जरा नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के उन आंकड़ों पर भी नजर डाल ही लेते हैं...साल 2009 के इन आंकड़ों के मुताबिक देश भर में महिलाओं से जुड़े 203804 मामले दर्ज किए गए...जिनमें बलात्कार के 21397 मामले सामने आए...जबकि महिलाओं के अपहरण के मामलों की संख्या 25741 रही...इसी तरह छेड़छाड़ के 38711 मामले दर्ज किए गये....जबकि यौन प्रताड़ना से संबंधित मामलों की संख्या 11009 रही...घर के दहलीज के अंदर महिलाएं कितनी सुरक्षित है....इन आंकड़ों से पता चल जाता है...अकेले 2009 में पति या फिर दूसरे संबंधियो की कूरता 89546 महिलाओं पर कहर बनकर बरपी....देश की राजधानी दिल्ली की हालत तो और चौंकाने वाली है....देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में से 23-8 फीसदी अकेले दिल्ली में ही होते हैं....आंकड़ों के लिहाज से देश में हर चौथी बलात्कार की घटना दिल्ली में ही होती है....देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश तो महिला अपराधों के मामले में सारी हदें पार कर दी है....यहां महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध देश के मुकाबले 11.9 फीसदी रही...आंकड़ों के मुताबिक इस प्रदेश में औसतन छह दिनों में एक महिला की अस्मत लूटी गई....चलिए इन अपराधों की एक बानगी भी देख लेते हैं....
हर 3 मिनट पर 1 महिला होती है अपराध की शिकार
हर 9 मिनट पर पति या रिश्तेदारों की क्रूरता की शिकार
हर 29 मिनट में 1 महिला होती है रेप की शिकार
हर 77 मिनट पर दहेज हत्या का 1 मामला
हर 240 मिनट पर 1 महिला करती है खुदकुशी
चौंकिए मत...ये उसी भारत की भयावह तस्वीर है...जहां नारी को देवी स्वरूपा माना गया है...ये उसी भारत की तस्वीर है जहां के लोकतंत्र की गाथा पूरी दुनिया गाती है...ये उसी भारत की तस्वीर है जहां के राष्ट्रपति खुद एक महिला है...संसद की अध्यक्षता एक महिला ही करती है...देश की सत्ता पर काबिज यूपीए अध्यक्ष भी एक महिला ही है और सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश की सत्ता भी एक महिला के हाथों में हैं....सुनने में भले ही ये सुखद लगे कि देश की उच्च सत्ता पर महिलाएं विराजमान हैं...उम्मीद की जा सकती है कि उस देश की महिलाओं की जिंदगी खुशहाल, उम्मीदें जगाने वाली और सतरंगी सपनों से लबरेज हो....लेकिन जब असलियत सामने आती है तो कलेजा मुंह को आ जाता है....जरा इस तस्वीर के एक और पहलु को भी देख लीजिए....शुरुआत करते हैं उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी के उस बयान से...जिसमें दर्द भी है...हमारी व्यवस्था को लेकर हताशा भी है और कड़वी हकीकत भी... लेकिन इस बयान पर बवाल खड़ा करने के बजाय गौर करने की जरूरत है....आखिर क्यों इस देश के उपराष्ट्रपति की पत्नी को कहना पड़ा कि बेटियों को पैदा होते ही मार दो...ताकि उन्हें बलात्कार जैसी घिनौनी करतूतों का शिकार ना होना पड़े....देश में महिलाओं के हालात क्या है ये किसी से छिपा भी नहीं है...घर के दहलीज से लेकर बाहर सड़क तक...हर जगह करनी पड़ती है आबरू की हिफाजत के लिए जद्दोजहद....खैर अब जरा नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के उन आंकड़ों पर भी नजर डाल ही लेते हैं...साल 2009 के इन आंकड़ों के मुताबिक देश भर में महिलाओं से जुड़े 203804 मामले दर्ज किए गए...जिनमें बलात्कार के 21397 मामले सामने आए...जबकि महिलाओं के अपहरण के मामलों की संख्या 25741 रही...इसी तरह छेड़छाड़ के 38711 मामले दर्ज किए गये....जबकि यौन प्रताड़ना से संबंधित मामलों की संख्या 11009 रही...घर के दहलीज के अंदर महिलाएं कितनी सुरक्षित है....इन आंकड़ों से पता चल जाता है...अकेले 2009 में पति या फिर दूसरे संबंधियो की कूरता 89546 महिलाओं पर कहर बनकर बरपी....देश की राजधानी दिल्ली की हालत तो और चौंकाने वाली है....देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में से 23-8 फीसदी अकेले दिल्ली में ही होते हैं....आंकड़ों के लिहाज से देश में हर चौथी बलात्कार की घटना दिल्ली में ही होती है....देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश तो महिला अपराधों के मामले में सारी हदें पार कर दी है....यहां महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध देश के मुकाबले 11.9 फीसदी रही...आंकड़ों के मुताबिक इस प्रदेश में औसतन छह दिनों में एक महिला की अस्मत लूटी गई....चलिए इन अपराधों की एक बानगी भी देख लेते हैं....
हरियाणा की प्रीति बहल ने टीटीई के छेड़छाड़ से तंग आकर रेलवे ट्रैक पर जान देने की कोशिश की
जयपुर में एक युवक ने प्रेम का प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद कोचिंग से लोट रही छात्राओं के मुंह पर तेजाब फेंका
दिल्ली में सीआरपीएफ के एक जवान ने अपने साथी के साथ मिलकर छात्रा से किया चार महीनों तक बलात्कार
दिल्ली में एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल पर चार शिक्षिकाओं ने लगाए बलात्कार के आरोप
पटना में एक सीआरपीएफ जवान ने मोबाइल नंबर नहीं देने पर एक महिला खिलाड़ी को गोलियों से भूना
उत्तरप्रदेश में बलात्कार का विरोध करने पर दबंगों ने एक लड़की के हाथ पैर काट डाला
जेएनयू में पैसा कमाने की लालच में छात्रा की ब्लू फिल्म बनाई
लुधियाना में एक विवाहिता ने दहेज प्रताड़ना से तंग आकर आत्मदाह किया
मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर में छेड़छाड़ के विरोध करने पर लड़की को जिंदा जलाया ये तो उदाहरण भर है....उत्तरप्रदेश का बांदा दुष्कर्म केस और बिहार का रुपम मामला भी हमारी व्यवस्था पर सवाल खड़े करने के लिए काफी है....और हां खाप पंचायते तो पहले से ही महिलाओं को अपना शिकार बनाती रही है....जाहिर है अब तो आप समझ चुके होंगे कि सलमा अंसारी आखिर निराश क्यों है
Monday, February 7, 2011
नक्सलवाद: सबसे बड़ी चुनौती
नक्सलवाद तेजी से फल फूल रहा है...अपने ही देश के लोग लोकतंत्र को चुनौती दे रहे हैं....कामरेड माओ के सिद्धांत को मानने वाले इन लोगों के मुताबिक राजनीतिक शक्ति बंदूक की नली से निकलती है....यही वजह है कि इस सिद्धांत को जिंदा रखने के लिए जब तब इंसानी बलि भी ली जाती है...ये नक्सलियों की बढ़ती ताकत नहीं तो और क्या है....जिसके आगे सारा तंत्र बेबस हो जाता है....वे जब चाहे...तब सिस्टम की धज्जियां उड़ा देते हैं....बेकसूर लोगों को मौत की नींद सुला देते हैं....देश की संप्रभुता को चुनौती देने वाली इन ताकतों के हाथ विदेशी ताकतों से भी मिले होते हैं..वे कहते हैं कि देश में गरीबी है...अन्याय है और गैरबराबरी है....इसलिए देश को लाल क्रांति की जरूरत है....इसके लिए लोगों का खून बहता हो तो बहे....ताज्जुब तब और होता है जब,.गरीबी, बीमारी और भूखमरी को ढाल बनाए इन हाथों को एक खास तरह के बुद्धिजीवियों का समर्थन भी मिल जाता है...उनके पक्ष में लोकतंत्र के प्रहरियों के बीच से ही कई आवाजें उठने लगती है....लेकिन सच्चाई यही है कि नक्सली लोकतंत्रिक भारत के लिए पूरी तरह खतरा बन चुके हैं...देश अपने ही भीतरी राज्यों में छापामार युद्ध झेलने को मजबूर है....पिछले साल नक्सलियों ने कई राज्यों में हिंसा का तांडव मचाया...सिर्फ अप्रैल महीने में ही पांच राज्यों में 16 जगहों पर हमले किए गए...इसके बाद भी ये तांडव रुका नहीं...दंतेवाड़ा में पुलिस को निशाना बनाकर नक्सलियों ने ये दिखा दिया कि उनकी रणनीति, हथियार और मारक क्षमता पहले से बेहतर हुई है...सबसे बड़ी बात...नक्सली देश के ज्यादातर राज्यों में अपनी पहुंच बना चुके हैं...साल 2004 में दो नक्सली गुटों एमसीसी और पीपुल्स वार ग्रुप के भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी माओवादी में विलय होने के बाद वे देश के करीब एक तिहाई हिस्से में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं..देश का 92 हजार किलोमीटर का इलाका नक्सली प्रभाव क्षेत्र में आता है...जिसे रेड कॉरिडोर कहा जाता है...223 जिलों में नक्सलियों की पैठ की बात सरकार भी मान चुकी है...आज देश के 14 राज्यों में नक्सवाद की लाल धारा बह रही है...लेकिन उन्हें रोकने में शासन पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है....अब तो कहा ये भी जाता है कि उनकी सांठगांठ पाकिस्तान के आईएसआई और दूसरे संगठनों से हो चुकी है...इस कारण वे पहले से और ज्यादा उग्र हो गए हैं.... उनके पास आधुनिक हथियार है...उनकी ताकत दिनोंदिन बढ़ती जा रही है...पिछले तीन सालों के दौरान नक्सलियों ने दो हजार से ज्यादा लोगों की जानें ले ली है....पिछले साल नक्सली हिंसा में 877 आम नागरिकों की मौत हुई...जो पिछले दो सालों की तुलना में काफी ज्यादा है...जाहिर है इसमें हमेशा की तरह इसका खामियाजा आम लोगों को ही भुगतना पड़ता है....बहरहाल नक्सलियों के हौसले बुलंद है...वो बार एक नई ताकत के साथ हमला करते हैं....और सरकार उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाती...
Saturday, January 29, 2011
मी गांधी बोलतेयो
वैष्णव जन तेने कहिए पीर पराई जान रे....ये मेरा प्रिय भजन है....जब तक जीवित रहा...इसे आत्मसात करता रहा....मुझे खुशी है कि मेरी मौत के बाद भी लोग इसे भूले नहीं है....आपको मेरी आवाज सुनकर ताज्जुब हो रहा होगा.....मैं महात्मा गांधी हूं....मोहनदास करमचंद गांधी वल्द करमचंद गांधी....दुनिया वाले प्यार से मुझे बापू बुलाते हैं.....वैसे रविंद्रनाथ टैगोर ने सबसे पहले मेरा नाम दिया था महात्मा...बाद में लोग भी मुझे महात्मा गांधी कहने लगे....प्यारे देशवासियों आज मेरी शहादत के 63 साल गुजर गए...लोग मेरी मौत को शहादत क्यों कहते हैं...अभी तक मुझे ये समझ में नहीं आया...लेकिन फिर भी इस शब्द का इस्तेमाल मुझे इसलिए करना पड़ रहा है कि क्योंकि ज्यादातर लोग मानते हैं कि मैं अपने कर्तव्य के बलिवेदी पर कुर्बान हुआ हूं....खैर आपका सोचना कितना सही है...इस बारे में मैं गहराई से जाना नहीं चाहता....मैं तो अपनी मौत के 63 साल बाद आपसे कुछ कहने आया हूं...पता नहीं आप मेरी बातों को कितना गंभीरता से लीजिएगा...कुछ बातें ऐसी भी होती हैं...जिसपर वक्त का धूल नहीं जमता...बल्कि वो हजारों साल बाद भी नूर की तरह चमकती रहती है...आज भी मैं आपसे कोई नई बात कहने नहीं जा रहा हूं....बल्कि पुरानी कही गई बातों को ही फिर से दुहरा रहा हूं......आज पूरा देश महंगाई, भ्रष्टाचार और भुखमरी से त्रस्त है....गरीब पहले से और गरीब होता जा रहा है...पूरी दुनिया बाजारवाद की गंभीर प्रसव पीड़ा से जूझ रही है....अपना देश भारत भी उन्हीं राहों पर निकल पड़ा है.....अगर आप मेरी बातों को ध्यान रखते तो शायद देश आज इस हालत में नहीं होता...भ्रष्टाचार और महंगाई तो इससे दूर ही रहती....मैं चिंता में डूबा हूं....पूरी दुनिया में आज दो अलग अलग तरह की दौड़ हो रही है...एक दौड़ उन लोगों की है जो संपन्न हैं...पर कुछ और पाने की लालसा लिए दौड़ में लगे हैं...दूसरी दौड़ उन लोगों की है जो दो जून की रोटी के लिए अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए जूझ रहे हैं....मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि आप भी उस दौड़ में लग चुके हैं....मुझे लगता है शायद आप मेरे उस मंत्र को भूल गए होंगे...जो मैने आपको दिया था ...
.जब भी कोई काम हाथ में लो..ये ध्यान रखो कि इससे सबसे गरीब और कमजोर व्यक्ति को क्या लाभ होगा...
.जब भी कोई काम हाथ में लो..ये ध्यान रखो कि इससे सबसे गरीब और कमजोर व्यक्ति को क्या लाभ होगा...
लेकिन आज कौन सुनता है...कौन याद रखता है मेरी बातों को....सब अपने ही धुन में लगे पड़े हैं....शायद नतीजों से अंजान...उन्हें नहीं पता कि बाजारवाद का अंत कितना खतरनाक होता है...समाज के एक हिस्से को कुचलना भले ही आसान हो...पर याद रखो...उनकी आह तुम्हारे हिस्से की रोटी भी एक दिन छिन लेगी.... आप क्यों नहीं अपनाते मेरे ये सिद्धांत...बहुजन सुखाय, बहुजन हिताय...यानी सर्वोदय का सिद्धांत...जीओ और जीने दो...फिर देखों जिंदगी की राह कितना आसान हो जाती है....एक बात मैं साफ कर देना चाहता हूं कि मैं भौतिक समृद्धि के खिलाफ नहीं हूं...और ना मैं मशीनों के इस्तेमाल को नकारता हूं...मैं तो बस इतना ही चाहता हूं कि मशीनों का दास मत बनो...मशीनें तुम्हारे लिए होनी चाहिए ना कि तुम मशीनों के लिए...शायद तुम्हें याद हो...एक बार मैंने कहा था कि
आर्थिक समानता अहिंसक स्वतंत्रता की असली चाबी है...शासन की अहिंसक प्रणाली कायम करना तब तक संभव नहीं है...जब तक अमीरों और करोड़ों भूखे लोगों के बीच की खाई बनी रहेगी
शायद तुमने इस बात का मतलब दूसरा ही निकाल लिया...तुमने तो उस खाई को और बढ़ा दिया है....गांवों के हालात तो और खराब होते जा रहे हैं...गांवों के लोग शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं....शहर गरीबों को आसरा देने से इनकार कर रहा है....भूख से लोग बिलबिला रहे हैं....अमीर पहले से और अमीर हो गया है....क्या मुझे इतना भी हक नहीं है कि मैं तुमसे ये पूछ सकूं....क्यों मेरे सपने के भारत को बर्बादी के कगार पर ले जाने में तुले हो...
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